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CBSE, ICSE, Isc and NIOS


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परीक्षा की तैयारी examination preparation

सामान्यतः किसी बड़ी परीक्षा की तैयारी कम-से-कम एक साल पहले आरम्भ की जाती है। 


यह व्यवस्था 8, 10 या 12 वीं  की  परीक्षाओं में सफलता के लिये आदर्श रहती है। 


इससे स्वःपठन (self study) और आवश्यक शब्दकोश व जटिल सिद्धान्तों को अङ्गभूत (absorb) करने के लिये पर्याप्त समय शेष रहता है। 


किसी भी पाठ्यक्रम का अवछोषण (absorption) अनुवृत्ति (repetition) से होता है।  


पाठों की विषय वस्तु का भली भाँति सञ्ज्ञान (understanding) लेने के पश्चात्  उसका परीक्षा में समाचरित (apply) करने की कला का प्रशिक्षण आपको इन कक्षाओं में बहुलता से (abundantly) प्राप्त होगा।  


हिन्दी पाठ्यक्रम के तीन भाग होते हैं - साहित्य (कहानी, कविता, निबन्ध, नाटक आदि), व्याकरण और रचनात्मक लेख (पत्र, निबन्ध, प्रचार, इत्यादि)। 


आपकी यथार्थ प्रवीणता के अनुसार कक्षाओं को इस प्रकार आयोजित किया जाएगा जिससे आपके वेधनीय (vulnerable) क्षेत्र भी पूर्णतः सशक्त बन जाएँ।


1. समयबद्ध आरम्भ


2. अनिवृत्ति से अवछोषण, प्रयोग में प्रवीणता


3. त्रिविध पाठ्यक्रम, वैयक्तिक ध्यान


अध्ययन के उद्देश्य व प्रणाली GOALS and methodology OF STUDIES

 शिक्षार्थियों के उद्देश्यों का  हिन्दी पाठ्यक्रम के साथ समन्वय

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साहित्य का प्रस्तार

साहित्य भोग का आनन्द अद्वितीय है। किसी भी कृति का सेवन, अनुशीलन तथा प्राज्ञता को व्यवहार में लाना किसी भी रचनाकार के मौलिक अभिप्राय होते हैं। साहित्य भी एक कलाकृति है जो इन लक्ष्यों से शून्य नहीं।  


प्रत्येक रचनाकार, चाहे वह किसी भी रस का हो और अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में मात्र एक कृति की ही रचना क्यों न की हो, उसका उद्देश्य होता है अपना दृष्टिकोण इस प्रकार प्रस्तुत करे कि अधिकाधिक लोगों के मर्म को स्पर्श कर सके, समाज और संस्थाओं में नवीन दृष्टिकोण व भावनाओं का संचारण कर सके तथा  सामान्य बुद्धिमत्ता  में वृद्धि लाने में योगदान दे। 


अतः शुभ अभिप्रायों से लिखा लेख कदापि हल्का नहीं  होता। अन्ततः प्रत्येक लेख को अपना पाठक प्राप्त हो ही जाता है, और प्रत्येक पाठक को अपना लेख। 

आपके व्यक्तिगत उद्देश्य

साहित्य अध्ययन में शिक्षार्थी की व्यष्टिगत आवश्यकता एवम् उनके उद्देश्य हमारे अध्ययन के स्पष्ट केन्द्रबिन्दु रहते हैं। यदि विद्यार्थी ने किसी औपचारिक पठन कार्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया हो, उदाहरणतः किसी विद्यालय या महाविद्यालय में, तथा अपने पाठ्यक्रम के सरलीकरण की आकाङ्क्षा रखता हो, तो इन अतिरिक्त कक्षाओं से उन्हें अतीव लाभ होगा। पाठ्यक्रम का यथोचित विभाजन तथा प्रदत्त अभ्यासकार्य विद्यार्थी को उनके कार्यक्रम में निपुणता प्राप्त करने में समर्थ व सशक्त करेगा।  

शिक्षण प्रणाली

  आप हिन्दी साहित्य व उसके विभिन्न पक्षों से सुपरिचित होने के स्पृहण हैं, तो ये कक्षाएँ आपके लिये आनन्ददायी व अर्थकरी होंगी। आपका निजी पाठ्यक्रम होगा जिसमें आप हिन्दी काव्यशास्त्र के रस, लिपि का इतिहास, सामाजिक यथार्थताओँ से अन्वित साहित्य के विभिन्न युगों के ताद्रूपों का गहन बोध करेंगे। यह पाठ्यक्रम सदैव स्वसंचालित तथा स्वावश्य होगा। आपको यथासमय पठन के लिये समीचीन लेखों, उपन्यासों, व्याकरण आदि की पुस्तकों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी।


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